बहुसंख्यकवादी राजनीति के दबाव में है कांग्रेस, उसे वैचारिक स्तर पर साहस दिखाना होगा: अपूर्वानंद

नयीदिल्ली,17अक्टूबर(भाषा)कांग्रेसपिछलेकुछवर्षोंसेनेतृत्वऔरसंगठनकेस्तरपरसंकटसेघिरीहै।पार्टीमेंअगलेसालसंगठनात्मकचुनावहोनेहैंलेकिनपार्टीकेभीतरहीएकधड़ानेतृत्वपरसवालखड़ेकररहाहै।देशकीसबसेपुरानीपार्टीकीमौजूदास्थितिकोलेकरजानमानेराजनीतिकटिप्पणीकारप्रोफेसरअपूर्वानंदसेपेशहै“भाषाकेपांचसवाल”औरउनकेजवाब:सवाल:कांग्रेसकीमौजूदास्थितिऔरउसमेंनेतृत्वकेसंकटकोलेकरआपक्याकहेंगे?जवाब:कांग्रेसएकअभूतपूर्वस्थितिकासामनाकररहीहै।इनदिनोंअधिकतरराजनीतिकदलबहुसंख्यकवादीराजनीतिकेदबावमेंहैं।उनकोबार-बारयहसाबितकरनापड़ताहैकिवोहिंदूवादीहैं।कोईभीदलखुदकोधर्मनिरपेक्षनहींकहनाचाहता।कांग्रेसभीइसराजनीतिकमाहौलमेंकामकररहीहै।वहभीएकगहरेराजनीतिकदबावमेंहै।उसकेभीतरइसकोलेकरएकसंघर्षचलरहाहै।सवाल:कांग्रेसखुदसेजुड़ेफैसलोंऔरविचारधाराकेस्तरपरभीएकअसमंजसकीस्थितिमेंक्योंनजरआरहीहै?जवाब:कांग्रेसकेसामनेएकदुविधाहैजोदूसरोंदलोंमेंनहींहै।कांग्रेसनेहमेशासमाजकेसभीतबकोंकोसाथरखनेकाप्रयासकियाहै,लेकिनदूसरेदलकिसीएकतबकेकीतरफसेबोलतेहैं।चाहेवामपंथीदलहीक्योंनहों।वोभीजबवर्गकीबातकरकरतेहैंतोकुछलोगोंकोअलगरखतेहैं।भाजपाभीकुछलोगोंकोअलगरखतीहै।सामाजिकन्यायकीबातकरनेवालेदलोंनेबड़ेहिस्सेकोअपनेसेबाहररखा,लेकिनकांग्रेसकिसीहिस्सेकोबाहरनहींरखसकती।यहीवजहहैकिकांग्रेसइसऊहापोहमेंरहतीहैकिवहकैसेसबकोआपनेसाथरखे।यहीनहीं,पिछलेकुछवर्षोंमेंयहराजनीतिकभाषाविकसितहुईहैकियातोआपमेरेसाथहो,यामेरेखिलाफहो।यहभीकांग्रेसकेलिएदिक्कतहैक्योंकिवहसामूहिकताकीबातकरतीहै।ऐसेमेंउसकामध्यमार्गीविचाराधाराकीपार्टीहोनाभीउसकेलिएदिक्कतपैदाकरहै।सवाल:कांग्रेसकीबहुसंख्यकसमाजमेंस्वीकार्यताकमक्योंहुईऔरउससेक्यागलतियांहुईं?जवाब:कांग्रेसकीसबसेबड़ीगलतीयहथीकिपिछलेकुछदशकोंमेंवहसत्ताकीपार्टीबनकररहगई।ऐसेमेंवहविचारऔरविचारधाराकेप्रतिलापरवाहहोगई।नेहरूकेसमयतकपार्टीमेंधर्मनिरेपक्षताऔरदूसरेसिद्धांतोंकोलेकरप्रतिबद्धताथी।बादमेंउसकोलेकरलापरवाहीदिखी।फिरकांग्रेससमझौतेकरनेलगीऔरत्वरितराजनीतिकलाभकीसोचकेसाथसमझौतेकरनेलगी।यहपहलेशाहबानोऔरफिरराममंदिरकातालाखुलवानेकेफैसलोंमेंदेखनेकोमिला।इसकेसाथही,कांग्रेसनेबदलतेराजनीतिकपरिवेशकेहिसाबसेकदमनहींउठाए।कईवर्गोंकोहिस्सेदारीयाराजनीतिकप्रतिनिधित्वनहींदिया।वहकईवर्गोंकीराजनीतिकअकांक्षाओंकोनहींसमझपाई।वहींपरकांग्रेसपिछड़गई।सवाल:कांग्रेसमेंअबतोगांधीपरिवारकेखिलाफआवाजउठनेलगीहैं।क्यापार्टीअतीतमेंभीऐसेबुरेदौरसेगुजरीहै?जवाब:इनदिनोंजिसजी-23समूहकीचर्चाहोरहीहैउसकेवैचारिकरुखकोलेकरमुझेजानकारीनहींहैं।अबतकउन्होंनेयहनहींबतायाकिकांग्रेसकोमजबूतकरनेकेलिएउनकेपासकोईब्लूप्रिंट(खाका)हैयानहीं।ऐसालगताहैकियहसबपर्देकेपीछेकाराजनीतिकदांवपेंचभरहै।इननेताओंमेंज्यादातरजननेतानहींहैं।अतीतमेंकांग्रेसकईबारसंकटोंसेघिरीहै।1960केदशकमेंपहलीबारसंकटमेंआईऔरकईराज्योंमेंकांग्रेसविरोधीसरकारेंबनी,कांग्रेसमेंविभाजनतकहोगयाथा।उसवक्तइंदिरागांधीकांग्रेसकोसंभाललेगईं।इसकेबाद1971मेंशरणार्थियोंकेमुद्दे,1976मेंजेपीआंदोलनऔर1977मेंचुनावीहारकेबादकांग्रेससंकटसेघिरी।1980मेंउबरीऔरसत्तामेंआई।मैंकहसकताहूंकि1980केबादकांग्रेसलगातारकहींनकहींसंकटमेंरहीहै।उसकाएककारणयहभीरहाहैकिपार्टीमेंऐसेलोगहावीहोगएजोवैचारिकनहोकररणनीतिकथे।राजीवगांधीकेसमययहआरंभहुआ।यहबिल्कुलनयादौरहै।लोकतांत्रिकसंस्थाओंपरसवालउठरहेहैं,ऐसेमेंकांग्रेसकेलिएयहसबसेचुनौतीपूर्णसमयहै।अबपार्टीकाफिरसेखड़ाहोनापहलेकेमुकाबलेज्यादामुश्किलहोगा।सवाल:ममताबनर्जीऔरअरविंदकेजरीवालकेराष्ट्रीयविकल्पबननेकेप्रयासोंकेबीचकांग्रेसकामौजूदासंकटसेउबरपानाकितनाचुनौतीपूर्णहोगा?जवाब:हरपार्टीकाकामकरनेकाएकतरीकाहोताहै।यहउथल-पुथलकांग्रेसमेंचलेगी।उसेराजनीतिकवातावरणकीमददभीनहींमिलरहीहै।अगरकांग्रेसकेलोगईमानदारीसेलड़ेंतोकुछहोसकताहै।तृणमूलकांग्रेसऔरआमआदमीपार्टीकोपूराअधिकारहैकिवोपूरेदेशमेंअपनाप्रसारकरें।कांग्रेसकोयहदेखनापड़ेगाकिवहइनसबकेबीचअपनेआपकैसेमजबूतबनातीहै।कांग्रेसकोविचारधाराकेस्तरपरयहसाहसपैदाकरनाहोगाकिवहअपनेमुख्यमतदातावर्गोंजैसेदलितऔरमुसलमानकेबारेमेंखुलकरबातकरे।कांग्रेसकोफिरखड़ाहोनेकेलिएऐसाकरनाहोगा।