गुरुनानक ने मीठा किया जल तो बन गया प्रसाद

नवनीतशर्मा,मथुरा:कान्हाकीनगरीकेकुएंकाखारापानीसिखोंकेप्रथमगुरुनानकदेवकेपुण्यप्रतापसेमीठाहोगयाथा।इसकुएंकामीठापानीश्रद्धालुओंमेंप्रसादकेरूपमेंबांटाजाताहै।

अगस्त1512मेंअपनीदूसरीउदासी(यात्रा)केदौरानगुरुनानकदेवअपनेशिष्यमरदानाऔरबालाकेसाथमथुराआएथे।उन्होंनेयमुनाकिनारेगऊघाटपरप्रवासकिया।यमुनामेंबाढ़आनेपरउन्होंनेमसानीस्थितबगीचीपरकरीब40दिनप्रवासकिया।इसीस्थानपरअबगुरुद्वारागुरुनानकबगीचीहै।उसकेमुख्यग्रंथीज्ञानीगोपीसिंहबतातेहैंकिबगीचीमेंगुरुनानकनेसंगतकीथी।बगीचीमेंएककुआंथा।संगतमेंशामिलश्रद्धालुओंनेकहाकिकुएंकापानीकाफीखाराहै।इसपरगुरुनानकदेवनेमरदानाकोकुएंकापानीनिकालकरसबकोबांटनेकोकहा।पानीबांटागयातोवहमीठाथा।तभीसेकुएंकामीठापानीसबकेलिएप्रसादबनगया।आसपासकेकुओंकापानीभीखाराहोनेसेलोगइसीकुएंसेपानीलेनेआनेलगे।

कालांतरमेंउसीस्थानकोगुरुद्वाराकारूपदियागया।वर्ष2006मेंगुरुद्वाराकाजीर्णोद्धारकियागया।अबकुएंमेंजाललगादियागया,लेकिनसबमर्सिबलकेजरिएपानीनिकालाजाताहै।आजभीआनेवालेश्रद्धालुयेपानीप्रसादकेरूपमेंअपनेसाथलेजातेहैं।पांचबारस्नानसेदूरहोतेहैंसंकट

ज्ञानीगोपीसिंहकहतेहैंकिमान्यताहैकिएकतिथितयकरयदिपांचबारइसकुएंकेजलसेस्नानकियाजाए,तोसंकटदूरहोजातेहैं।बड़ीसंख्यामेंश्रद्धालुकुएंकेजलसेस्नानकरनेभीआतेहैं।वहकहतेहैंकिगुरुनानकदेवनेअपनेप्रवासकेदौरानलोगोंकोमानवताकेसाथजीवनजीनेकासंदेशदिया।परमेश्वरकानामजपनेऔरबांटकरखानेकीशिक्षादी।यहांसेवहवृंदावनगए।गुरुनानकदेवनेकरीबचारमाहतकब्रजमेंप्रवासकिया।

अखंडपाठकाहोगासमापन

मथुरा:गुरुनानकदेवकाजन्मोत्सवइसवर्षसादगीसेमनायाजारहाहै।28नवंबरसेशुरूहुएअखंडपाठकासमापनसोमवारकोसाढ़ेनौबजेहोगा।इसकेबादएकघंटाकीर्तनकियाजाएगा।कोरोनाकेकारणइसवर्षलंगरकाआयोजननहींहोगा।अरदासकेबादश्रद्धालुओंकोप्रसादवितरितकियाजाएगा।गुरुद्वाराकोसजाया-संवाराजारहाहै।