हिंदी साहित्य के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थीं महादेवी

जागरणसंवाददाता,पठानकोट:आदर्शभारतीयमहाविद्यालयपठानकोटकेहिदीविभागकीओरसेछायावादकीमहानसाहित्यकारआधुनिकयुगकीमीरामहादेवीवर्माकी115वींजयंतीकेउपलक्ष्यपरसेमिनारवप्रतियोगिताकाआयोजनकियागया।इसमेंकार्यवाहकप्रिसिपलडा.राजेंद्रगुप्तामुख्यअतिथिवसांस्कृतिकविभागप्रमुखडा.अनिलडोगराविशिष्टअतिथिकेरूपमेंउपस्थितहुए।

हिदीविभागाध्यक्षडाक्टरमनुशर्मानेकहामहादेवीवर्माजीहिन्दीसाहित्यकीएकमहानकवियत्रीऔरसुविख्यातलेखिकाथी।उन्हेंहिन्दीसाहित्यकेछायावादयुगकेचारप्रमुखस्तंभोंमेंसेएकमानाजाताहै।महादेवीवर्मानेहिदीसाहित्यजगतमेंएकबेहतरीनगद्यलेखिकाकेरूपमेंअपनीपहचानबनाईथी।उनकाजन्म26मार्च1907कोहोलीवालेदिनफर्रुखाबादमेंहुआ।मात्रनौसालकीउम्रमेंउन्होंनेअपनीपहलीकवितामांकेठाकुरजीभोलेहैं..लिखीथी।उन्हेंपद्मविभूषणसेसम्मानितकियागया।सांस्कृतिकविभागप्रमुखडा.अनिलडोगरानेकहाकिहिदीविभागआजादीकेअमृतमहोत्सवकेतहतजोकार्यकररहाहैवहसराहनीयहै।कार्यवाहकप्रिसिपलडाक्टरराजेंद्रगुप्तानेहिदीविभागकेविद्यार्थियोंद्वाराप्रस्तुतकार्यक्रमकीप्रशंसाकी।उन्होंनेकहाकिछायावादकीप्रमुखस्तंभमहादेवीवर्माकीजयंतीकेउपलक्ष्यपरजोकार्यक्रमआयोजितकियागयाहैकिकाबिलेतारीफहै।मौकेपरहिदीविभागकीओरसेअतिथियोंकोविशेषरूपसेसम्मानितकियागया।