जन सहयोग से बदली विद्यालय की तस्वीर

खगड़िया।आजकलसरकारीविद्यालयकुव्यवस्थाकापर्यायमानेजानेलगेहैं।परंतुशिक्षकोंकेलगनऔरग्रामीणोंकेसहयोगसेमध्यविद्यालयदीनाचकलाआजमॉडलविद्यालयबनचुकाहै।जनसहयोगसेइसविद्यालयकीतस्वीरहीबदलगईहै।आजविद्यालयकीव्यवस्था,सुविधातथास्वच्छतादेखतेहीबनतीहै।29अगस्तकोमध्यविद्यालयदीनाचकलाकोराज्यस्तरीयस्वच्छतापुरस्कारमिला।आजइससफलतापरविद्यालयपरिवारसमेतग्रामीणगर्वकररहेहैं।अबतोआसपासकेग्रामीणऔरगुरुजीयहांकीव्यवस्थादेखनेआतेहैं।

8सितंबर1942कोस्थापितमध्यविद्यालयदीनाचकलाकीशुरुआतएककमरेकेभवनसेहुईथी।बादमेंग्रामीणमिश्रीप्रसाद¨सहद्वारासड़ककिनारेकीबहुमूल्यजमीनविद्यालयकोदानमेंदीगई।उसकेबादविभागीयस्तरपरयहांपांचकमरेकाभवनबना।परंतुयहांभवनकीकमीवसुविधाओंकाटोटारहा।जिससेविद्यालयकासंचालनजैसे-तैसेहोतेरहा।कालांतरमेंग्रामीणजागरूकहुएऔरआपसमेंचंदाकरविद्यालयविकासकेलिएराशिप्रधानाध्यापककोसौंपा।ग्रामीणोंकीनिगरानीमेंविद्यालयविकासकार्यआरंभहुआ।सबसेपहलेविद्यालयभवनकोदुरुस्तकियागया।जनसहयोगसेयहांतीनमंजिलकाभवनबना।शौचालयबनाएगए।पानीटंकीलगातथाशुद्धपेयजलकोलेकरफिल्टरवआरओलगाएगए।विद्यालयकासौंदर्यीकरणकियागया।साज-सज्जावस्वच्छताकेबलपरयहविद्यालयस्वच्छतामामलेमेंराज्यस्तरीयपुरस्कारप्राप्तकिया।

प्रधानाध्यापकबोले

प्रधानाध्यापकनरेंद्रवर्माकहतेहैंकिविद्यालयकीव्यवस्थासुधारनेमेंग्रामीणोंनेतन-मनऔरधनसेसहयोगकिया।जिससेआजविद्यालयकीअपनीअलगपहचानबनीहै।अबतोआसपासकेलोगभीइसविद्यालयकोदेखनेआतेहैं।

मुखियाराकेशकुमारनेकहाकिप्रधानाध्यापककीलगनऔरग्रामीणोंकीमेहनतरंगलाई।आजविद्यालयकेपासकिसीचीजकीकमीनहींहै।ग्रामीणोंनेविद्यालयकेविकासमेंहरसंभवसहयोगदिया।