कभी करते थे आचमन, अब स्पर्श से डर

जागरणसंवाददाता,सिकंदरपुर(बलिया):कभीइत्रवगुलाबोंकीखुशबूसेसराबोररहनेवालासिकंदरलोदीकानगरदुर्गंधकापर्यायबनगयाहै।जिम्मेदारोंकीउपेक्षावआमजनकीमनमानीनेऐतिहासिकतापरग्रहणलगादियाहै।अभीबातमोहल्लास्थितकिलापोखराकीकरेंतोकभीइसकापानीआचमनसेलेकरनहानेकेकामआताथा।जबकिआजउसजलकोस्पर्शकरनेसेलोगडरतेहैं।

कारणघरोंकेनाबदानवशौचालयोंकागंदापानीउसमेंगिररहाहै।दुर्गंधइतनीकिउधरसेगुजरनेवालोंकोनाकबंदकरनीपड़तीहै।यहीनहींजलाशयकोचारोंतरफसेकूड़े-कचरेसेपाटदियागयाहै।देखकरऐसालगताहैमानोयहजलाशयनहीं,बल्किकूड़ेकचरेकाडंपिगस्थलहै।कभीस्वच्छजलकेलिएइसजलाशयकालोगनामलियाकरतेथे।इसीकेजलसेपासस्थितशिवमंदिरकीसफाईहोतीथी।लोकतंत्रसेनानीशंभूमिश्रानेबतायाकितबइसजलाशयकापानीपीकरकरलोगबागअपनीप्यासबुझातेथे।अबइसकापानीछूनेलायकभीनहींहै।कमलेशतिवारीकाकहनाहैकिपोखरेमेंनाबदानकापानीगिरानेसेइसकीसूरतबिगड़गयीहै।रामजीवर्मानेबतायाकिकरीबएकसालपूर्वनगरपंचायतनेइसकेसुंदरीकरणकीघोषणाकीथीलेकिनवहपूरानहींहोसका।यहऐतिहासिकजलाशयउपेक्षाकाशिकारहोगयाहै।

अमृतसरोवरकेतहतसुंदरीकरणकीउठीमांग

अबअमृतसरोवरयोजनाकेतहतइसपोखरेकेसुंदरीकरणकीमांगउठनेलगीहैताकिइसधरोहरकोसुरक्षितरखाजासके।यहपोखरासिकंदरपुरकेइतिहासकागवाहहैबावजूदइसकोसुरक्षितरखनेकेप्रतिउदासीनताबरतीजारहीहै।