मनुष्य की चेतना को प्रेरित करता मानववाद की बुनियाद पर लिखा संत साहित्य

मोतिहारी।हिदीसाहित्यकेइतिहासमेंसंतसाहित्यअपनीमहतीभूमिकाकेसाथआजभीप्रासंगिकहै।मानवतावादकीबुनियादपरलिखागयायहसाहित्यअनवरतमनुष्यकीचेतनाकोप्रेरितकरताहै।संतसाहित्यकेसामाजिकएवंसांस्कृतिकसंदर्भोंकोलेकरचितन,मननकीसंकल्पनाकेसाथमहात्मागांधीकेंद्रीयविश्वविद्यालयमेंसोमवारकोएकदिवसीयई-संगोष्ठीकाआयोजनकियागया।विश्वविद्यालयकेशोधएवंविकासप्रकोष्ठकेतत्वावधानमें'संतसाहित्य:सामाजिकएवंसांस्कृतिकसंदर्भ'विषयकई-संगोष्ठीकीपरिकल्पनानेविश्वविद्यालयकेकुलपतिसंजीवकुमारशर्माकेदिशा-निर्देशनमेंआकारलिया।कार्यक्रमकीअध्यक्षताकुलपतिप्रो.शर्मानेकी।राष्ट्रीयस्वयंसेवकसंघकेसहसरकार्यवाहडॉ.कृष्णगोपालसंगोष्ठीकेमुख्यअतिथिथे।मंगलाचरणसेकार्यक्रमकाआगाजहुआ।संस्कृतविभागकेसहायकप्राध्यापकडॉ.विश्वेशनेमंलाचरणप्रस्तुतकिया।वक्तव्यकोनवीन²ष्टिप्रदानकरतेहुएमुख्यअतिथिडॉ.कृष्णगोपालनेकहाकिसंतसाहित्यआध्यात्मिकलोगोंकासाहित्यहै।भारतकीसर्वाधिकमहत्वपूर्णबातआध्यात्महै।यहीहमारी'आत्मा'है।समाजकेव्यापकआयामोंसेजोड़तेहुएउन्होंनेसामाजिकविघटनकीओरभीसंकेतकिया।कहा-भक्तिआंदोलनऔरसमताआंदोलनइसीविघटनकेविरुद्धसमवेतआवाजहै।अध्यक्षीयवक्तव्यमेंकुलपतिप्रो.संजीवकुमारशर्मानेसर्वप्रथमसभीवक्ता-अतिथियोंकास्वागतकिया।अपनेसंबोधनमेंउन्होंनेकहाकिसंत-परंपरा'एकात्म'कीपरंपराहै।कालिदास,तिरुवल्लुवरएवंआगेकीपरंपरासेसभीकोजोड़तेहुएगंभीरएवंतार्किकबातेंरखीं।बीजवक्तव्यदेतेउत्तरप्रदेशहिदीसांस्थानलखनऊकेअध्यक्षप्रो.सदानंदगुप्तनेअपनेविस्तृतएवंगम्भीरव्याख्यानमेंकहाकिसंतसाहित्यकेकवियोंमेंसुंदरआत्माभिमानहै।यहआत्माभिमानहीशब्दबोधहै,जिसकीबातआगेचलकरभारतेंदुहरिश्चंद्रकरतेहैं।भक्तिसाधकोंनेसमस्तभेदोंकोमिटाकरमुनष्यकोसदैवउपररखाहै।कार्यक्रमकेमुख्यवक्ताकेरूपमेंहिमाचलप्रदेशकेंद्रीयविश्वविद्यालयकेकुलपतिप्रो.कुलदीपचंद्रअग्निहोत्रीनेव्याख्यानदिया।उन्होंनेकहाकिसंतसाहित्यकीसाधनासांस्कृतिक-साधनाहै।संतोंनेनिराशाकेअंधकारकोचुनौतीदीहै।आमभाषामेंकविताकहकेसभीकेअंतसकोछुआहै।साहित्यएवंविचारधाराकेव्यापकपहलुओंपरगहरीपकड़रखनेवालेदिल्लीविश्वविद्यालयकेप्रो.चंदनचौबेनेकहाकिसंतकाव्यमानवीयगरिमाकाकाव्यहै।भारतीयसंस्कृतिकोवहनकरतीसंत-कविताजागरणकेठोसधरातलपरखड़ीहै।यहकाव्यसत्यकाआग्रहकरताहै।इसकेमूलमेंसाहित्यकाप्रस्थानविदुहै।राष्ट्रीयई-संगोष्ठीमेंशामिलविद्वानोंकास्वागतकरतेहुएहिदीविभागकेसहायकप्राध्यापकडॉ.अंजनीश्रीवास्तवनेकहाकिसंतसाहित्यधर्मांतरणकोरोकनेएवंमिट्टीकीओरलौटनेकासाहित्यहै।वहीं,ई-संगोष्ठीकासंचालनकरतेहुएकार्यक्रमकेसंयोजकएवंहिदीविभागकेसहायकप्राध्यापकश्यामनंदननेकहाकिसंतोंनेसमाजजागरणकामहत्वपूर्णकार्यकियाहै।जिसकाअवलोकनभारतीयताकी²ष्टिसेकरनेकीआवश्यकताहै।कार्यक्रमकेआयोजनमेंहिदीविभागकेडॉ.गोविदप्रसादवर्मा,पुस्तकालयविज्ञानविभागकेडॉ.भवनाथपांडेय,वाणिज्यविभागकेडॉ.शिवेंद्रएवंहिदीविभागकीसहायकआचार्यडॉ.गरिमातिवारीनेभीसक्रियभूमिकानिभाई।धन्यवादज्ञापनभाषाएवंमानविकीविभागकेसंकायप्रमुखप्रो.राजेन्द्रसिंहनेकिया।