पूंजीपतियों का शिक्षा पर आधिपत्य

मथुरा,वृंदावन:शिक्षकशब्दकाउपयोगअबअध्ययनकेलिएप्रयुक्तहोनेलगाहै,लेकिनमूलरूपसेइसकाअर्थसीखनाएवंसिखानादोनोंहीहै।फोगलाआश्रममेंसांविधानिकएवंसंसदीयअध्ययनसंस्थानद्वाराआयोजितशिक्षाकेव्यवसायीकरणपरआधारितसेमिनारमेंगुरुवारकोयेबातविधानपरिषदकेसभापतिरमेशयादवनेकही।

सभापतिनेकहाकिसीभीदेशकीसम्पन्नताउसदेशकीजनसंख्याकेसाक्षरताअनुपातपरनिर्भरहै।पिछले50से100वर्षोंमेंभारतकीसाक्षरतादरगिरानेमेंअंग्रेजीहुकूमतजिम्मेदारहै।देशमेंस्वतंत्रताकेआंदोलनकेसाथराष्ट्रीयशिक्षाकाभीआंदोलनचला।इसमेंस्वामीविवेकानंद,स्वामीदयानंदसरस्वती,महर्षिअर¨वद,महात्मागांधी,महामनामदनमोहनमालवीयआदिनेमहत्वपूर्णयोगदानदिया।1990मेंवैश्वीकरणकीशुरूहुईहवाकाअसरशिक्षापरभीपड़नेलगा।सरकारेंउच्चशिक्षासेअपनाहाथखींचनेलगीं।जिसकापरिणामयेरहाकिपूंजीपतियोंकाशिक्षापरअधिपत्यहोनेलगगया।

प्रो.रमाशंकरमिश्रनेकहायदिहमेंशिक्षाकेव्यवसायीकरणयाबाजारीकरणकोरोकनाहैतोहमेंसच्चेमनसेइसकेलिएकार्यकरनाहोगा।पहलेहमेंशिक्षापरव्ययबढ़ानाचाहिए।विकसितदेशोंमेंयहव्ययसकलघरेलूउत्पादनका6फीसदीअथवाइससेअधिकहै।हमेंकमसेकम6फीसदीतकलानाचाहिए।सेमिनारमेंडॉ.अतुलकुमारयादव,जमीलअहमद,अनंतबहादुर,उदयराज,डॉ.आशात्रिपाठी,संजययादव,नूतनयादव,डॉ.अल्पायादव,वीनामहेंद्र,डॉ.अरुणकुमारयादव,कृष्णनारायणमिश्र,महेंद्रनारायणसक्सेनासमेतअनेकलोगमौजूदरहे।संचालनवियजआचार्यनेकिया।